कविता

बेजुबान की बोली-कविता

दोस्तों!आज की कविता जैव-विविधता के ह्रास (Biodiversity Loss) के ऊपर है,खासकर जीव-जन्तु की विलुप्तता के संदर्भ में।मैं जल,जंगल और जमीन से जुड़ा हुआ आदमी...

पिता दिवस

पिता दिवस पर पिता को समर्पित चंद पक्तियां। यह पक्तियां उस समय लिखी गई थी जब  परिवार में एक ऐसे व्यक्ति की जरूरत हो...

अपना गांव अपना घऱ your village is your house

चलो दरख्तों से मिल आए हम चलो अपने घऱ हो आए हम जड़ों से मिला है उन्हें खनिज पानी चलों मिट्टी हो जाए हम मां की रसोई की...

इश्क की समझ:कविता।।The Understanding of Love:Poetry

दोस्तों,करीब दो साल के अंतराल के बाद कविता लिखने के शौक को पुनर्जीवित कर रहा हूँ।मेरा प्रयास रहेगा कि प्रत्येक रविवार एवं छुट्टी के...

बेजुबान की बोली-कविता@

दोस्तों!आज की कविता जैव-विविधता के ह्रास (Biodiversity Loss) के ऊपर है,खासकर जीव-जन्तु की विलुप्तता के संदर्भ में।मैं जल,जंगल और जमीन से जुड़ा हुआ आदमी...

अपना पता-कविता

दोस्तों अपनी बात को कम शब्दों में कह देने की कला ही कवि को दूसरों से अलग बनाता है।कवि जो कह रहा है...

घर और सफर-कविता

रोज निकलता हूँ, घर से, घर की,जरूरतों को पूरा करने के लिये। सफर करता हूँ, मीलों तक, सफर की,जरूरतों को पूरा करने...

स्वच्छता का भी मज़ाक बना दिया

  स्वच्छता जैसे शब्द का हास्य बना दिया | तुझे हास्य और मुझे खास बना दिया | गाँधी दिवस को स्वच्छता दिवस बना...

समझौता

दोस्तों आज की पंक्तियाँ मनोभाव(Attitude) के संदर्भ में है।’जग’ यानि दुनियाँ,’अपनी’ मतलब हम स्वयं एवं ‘अपनों’ का मतलब यहाँ अपने सगे-संबंधियों से है।इसका शीर्षक...

तुम ही हो अबला,तुम ही हो सबला, तुम ही शिव की शक्ति हो

तू हजारो मिल दूर है मुझसे ,पर तुझे रोज जीता हु मैं, सब पूछते है मुझसे ,तू कौन, मैं कहता ये प्रश्न...

Latest news