किसानों को नवंबर में अच्छे मुनाफे के लिए इन फसलों को उगाना होगा1 min read

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किसानों के लिए नवंबर का महीना बहुत महत्वपूर्ण होता है यह मौसम किसान भाइयों के लिए काम करने का साहस और उत्साह दोनों ही चरम पर होता है गेहूं की बुवाई भी नवंबर के महीना से स्टार्ट हो जाती है यह महीना दुनिया के लिए बहुत महत्पूर्ण महीना होता है नवंबर के महीना मैं गेहूं की बुवाई करने का जुनून अलग नजर आता है इस महीने मैं फसलों पर काफी काफी असर भी पड़ता है किसान भाई नवंबर में गेहूं के साथ-साथ और किन-किन फसलों को उगाकर सबसे अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. तो आइए जानते हैं

गेहूं (wheat )

wheat

किसान भाइयों के लिए गेहूं न केवल एक बहुत ही महत्वपूर्ण फसल है बल्कि इससे किसानों को अच्छा मुनाफा भी मिलता है इससे किसानो की आर्थिक स्थिति को सुधारने की क्षमता भी है नवंबर महीने के पहले सप्ताह में खेतों को तैयार करना अनिवार्य है, इस महीने मे गेहूं की बुवाई जोरों पर रहती है बुवाई के लिए गेहूं के लिए यह अच्छा टाइम होता है इस समय बुवाई के लिए अधिकतम लाभ मिलने की संभावना है अच्छे किसान नवम्बर माह से खेतों की मिट्टी का गेहूं के लिए परीक्षण करवा लें ताकि खेतों मैं कमी को पूरा करने के लिए अच्छा उपचार किया जा सके

चना (chickpea)

15 नवंबर से चना की बुवाई को पूरा कर लेना चाहिए आमतौर पर चने की किस्में पूसा 256, पंत जी 114, केडब्ल्यूआर 108 और के 850 बुवाई के लिए अच्छी होती हैं यदि काबुली चना बोना है तो पूसा 267 और एल 550 किस्मों का चयन बेहतर है.आप को चने की बुवाई से पहले मिट्टी की जांच कराकर कृषि वैज्ञानिक से खाद और उर्वरक की मात्रा निश्चित करवाएं अन्यथा चना की खेती के लिए 45 किलो फास्फोरस, 30 किलो पोटाश और 20 किलो नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर का प्रयोग उपयुक्त है चने के बीजों को राइजोबियम कल्चर और पीएसबी कल्चर से उपचारित करके बोएं. प्रति हेक्टेयर बुवाई के लिए बड़े अनाज वाली किस्मों के 100 किलो बीज और छोटे और मध्यम अनाज की किस्मों के 80 किलो बीज का प्रयोग करना चाहिए.

मटर और मसूर

मटर और मसूर की बुवाई को आमतौर पर अक्टूबर महीने के आखिरी में ही किया जाता है, अगर किसी कारण से अक्टूबर महीने के आखिरी तक बुवाई नहीं हो पाई है तो आप को 15 नवंबर तक बुवाई का कार्य जरूर कर लें आप को पता होना की मसूर की बुवाई के लिए लगभग 40 किलो बीज प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है इसी प्रकार मटर की बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर 100 किलो बीज की आवश्यकता होती है अन्यथा आप को अच्छा मुनाफा नहीं मिल सकता अगर पिछले माह बोई गई मटर व मसूर की दाल में यदि सूखापन दिखे, तो जरूरत के अनुसार सिंचाई करें. इसके अलावा खेत में अच्छी तरह से निराई-गुड़ाई करें, ताकि खरपतवार नियंत्रण में रहें.

जौ Barley

jau ki kheti

जौ को नवंबर में बोया जाता है जौ के लिए खेत में बुवाई का कार्य नवंबर तक पूरा कर लेना चाहिए जौ की देर से होने वाली फसल को दिसंबर के अंत तक बोया जाता है जौ की बुवाई को समय से करना ही बेहतर होता है क्योंकि देर से बोई जाने वाली फसल कम उपज देती है जौ की बुवाई में सिंचित और असिंचित खेतों में अंतर होता है विजया, कैलाश, आजाद, अंबर और करण जौ की 795 किस्में सिंचित खेतों के लिए अच्छी हैं. केदार, डीएल 88 और आरडी 118 किस्में देर से बुवाई के लिए अच्छी होती हैं.

तूर अरहर फसल

अरहर फसल

अरहर की फसल इसी महीने में पकना शुरू हो जाती हैं अगर 75 प्रतिशत फसल पक चुकी हों, तो कटाई कर लें यदि अरहर की देर से पकने वाली किस्मों पर फली छेदक द्वारा हमला किया जाता है, तो फसल को मोनोक्रोटोफॉस 36 ईसी के साथ 600 मिलीलीटर पर्याप्त पानी मिलाकर स्प्रे करें.

आलू Potato

Potato

आलू के खेत मैं इस महीने तुरंत सिंचाई कर देनी चाहिए यदि आलू के खेत सूखे दिखाई दें, ताकि इसका उत्पादन तेजी से हो सके. यदि आलू की बुवाई के 5-6 सप्ताह बाद हो, तो 50 किलो यूरिया प्रति हेक्टेयर डालें. सिंचाई के बाद आलू के पौधों पर मिट्टी को अच्छी तरह से लगाएं.

राई और सरसों

राई और सरसों

राई और सरसों के पौधों के बीच की दूरी लगभग 15 सेमी हो और अतिरिक्त पौधों को खेत से काटकर पशुओं को खिलाएं अतिरिक्त पौधों को इस तरह से हटा दें ताकि सरसों के पौधों की ग्रो अचे से हो. बुवाई के 1 महीने बाद सरसों में बची हुई नत्रजन की मात्रा पहली सिंचाई और छिड़काव विधि से देनी चाहिए. राई और सरसों के पौधों को सफेद गेरू और झुलसाने वाली बीमारियों से बचाने के लिए पर्याप्त पानी में 2 किलो जिंक मैंगनीज कार्बामेट 75 प्रतिशत दवा का छिड़काव करें. इसके साथ ही प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें. सरसों को चूरा और महू कीट से बचाने के लिए डेढ़ लीटर इंडोसल्फान दवा को 800 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें.

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