एक स्वदेशी क्रीम का 90 वर्षों पुराना इतिहास1 min read

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स्वदेशी अवधारणा को समेटे हुए एक एंटीसेप्टिक क्रीम बोरोलीन 

हम आज कल स्वदेसी Swadeshi की बाते रोज़ाना टीवी पर सुन रहे है यहाँ तक की चीन से आने वाले सामान और एप्प्स पर भी सरकार ने रोक लगा दी गयी है हमारे देश में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी बार बार स्वदेसी Swadeshi अपनाने और आत्मनिर्भर बनने की बात कह चुके है कुछ लोगो को का मानना है की यह इतना आसान नहीं है, लेकिन एक ऐसा स्वदेशी Swadeshi उत्पाद भी है जिसका नाम सभी ने सुना होगा लेकिन उससे जुड़े इतिहास के बारे में काम ही लोग जानते होंगे तो चलिए आज उस स्वदेशी Swadeshi उत्पाद की बात करते है। 

बोरोलीन Boroline के बारे में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो नहीं जानता होगा। 1929 में, कोलकाता में व्यापारी समुदाय के एक प्रतिष्ठित सदस्य गौर मोहन दत्ता ने एक कंपनी जीडी फार्मास्यूटिकल्स की स्थापना की, जिसका उद्देश्य औषधीय उत्पादों का निर्माण करना था। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इस समय भारत में अंग्रेजों का शासन था और हम स्वतंत्रता के लिए प्रयास कर रहे थे। जब कंपनी बोरोलीन Boroline को बाजार में लाई, तो सभी चकित रह गए। और अंग्रेजों ने क्रीम के उत्पादन को रोकने की कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे और क्रीम घरों तक पहुंचने में कामयाब रही। तब से 90 साल हो गए हैं और बोरोलन अभी भी मजबूत हो रहा है। एक भारतीय मॉडल पर स्थापित कंपनी पर सरकार का एक रुपया भी कर्ज नहीं है। 

बोरोलीन Boroline को लेकर विश्वास :

उन युवा लोगों से, जिन्होंने पिंपल या सूखी त्वचा पर प्रयोग किया, से लेकर उन् माताओं में भी इस उत्पाद को लेकर विश्वास है जो  अपने छोटे बच्चों के घावों पर उदारतापूर्वक इसे प्रयोग करती है एक भरोसेमंद एंटीसेप्टिक, बोरोलिन Boroline, अभी भी प्राथमिक चिकित्सा किट का एक अभिन्न अंग है।

क्रीम का रहस्य :

पश्चिम बंगाल में पैदा हुए इस उत्पाद के पीछे कोई गुप्त सूत्र नहीं है। यह बोरिक एसिड, जिंक ऑक्साइड, पैराफिन, इत्र और आवश्यक तेलों से बना है। इस फॉर्मूले को सभी को पता होने के बावजूद, ब्रिटिश कंपनियां या बहुराष्ट्रीय कंपनियां बोरोलीन Boroline की लोकप्रियता को कम करने में सक्षम नहीं हैं। 

उस समय सभी ने इसका उपयोग किया था: 

जब भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त की, तो गौर मोहन दत्ता के पुत्र देबासीस दत्ता कंपनी के एमडी थे। यह कहा जाता है कि जब हमें 1947 में स्वतंत्रता मिली, तो कंपनी ने लोगों को मुफ्त बोरोलीन क्रीम वितरित की। इतना ही नहीं, क्रीम इतनी प्रसिद्ध हुई कि पंडित जवाहर लाल नेहरू, अभिनेता राजकुमार ने इसका उपयोग करना शुरू कर दिया था।

पतंजलि के साथ तुलना: 

पहले जब कोई मार्केटिंग नहीं थी, कोई विज्ञापन नहीं था उस समय से लेकर आज भी बोरोलीन Boroline बाजार में अपनी पकड़ बनाये हुए है आज बाबा रामदेव की पतंजलि एक घरेलू नाम बन गया है। नेस्ले, कोलगेट जैसे बड़े नामों को पतंजलि से खतरा महसूस होता है। उसी तरह ब्रिटिश कंपनियों को उस समय इसकी प्रसिद्धि से खतरा था।


उत्कृष्टता की परंपरा: 

स्किनकेयर उत्पादों की बाजार में भरमार है जिसने भारतीय बाजार में बाढ़ ला दी है, ऐसे समय में भी बोरोलीन Boroline ने बाजार में अपनी स्थिति को सफलतापूर्वक बनाए रखा है। इस स्थिरता का रहस्य गुणवत्ता, इसके नवीन उत्पादों और विशिष्ट पैकेजिंग का पालन हो सकता है। कंपनी के पास सभी अनिवार्य सरकारी लाइसेंस प्राप्त हैं और सभी मानदंडों का अनुपालन करती है।

बोरोलीन Boroline के जुनून के पीछे क्या है? 

यह स्वदेशी Swadeshi वस्तुओं की निर्भरता के साथ अत्यधिक जुड़ा हुआ है। यह घरेलू उत्पाद विदेशी वस्तुओं के विपरीत सस्ती दरों पर उपलब्ध था और बंगालियों को देने के लिए बहुआयामी लाभ थे। सबसे महत्वपूर्ण बात, यह भारतीयों के राष्ट्रवाद का प्रतिनिधित्व था और उभरते बंगाली मध्यम वर्ग के लिए एक नए युग को चिह्नित करता था। 

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