Reading Time: 2 minutes

Holi in Hindi: फाल्गुन मास की पुर्णिमा को मनाई जाती है। होली के साथ अनेक पौराणिक कथाएं जुड़ीं हुई हैं। होली मनाने के एक रात पहले होली को जलाया जाता है। इसके पीछे एक लोकप्रिय पौराणिक कथा है। आइये जानते है होली का महत्व –

विष्णु भक्त प्रह्लाद के पिता थे हरिण्यकश्यप जो स्वयं को भगवान मानते थे । वह भगवान विष्णु के कठोर विरोधी थे जबकि प्रह्लाद विष्णु के भक्त थे। हरिण्यकश्यप ने प्रह्लाद को विष्णु भक्ति करने से कही बार रोका जब प्रह्लाद नहीं माने तो उन्होंने प्रह्लाद को कही तरीके से मारने का प्रयास किया, पर सब प्रयास असफ़ल हुए ।

प्रह्लाद के पिता हरिण्यकश्यप ने आकर अपनी बहन होलिका से मदद मांगी। होलिका को आग में न जलने का वरदान प्राप्त था। होलिका अपने भाई की सहायता करने के लिए तैयार हो गई। होलिका प्रह्लाद को लेकर आग की चिता में जा बैठी परन्तु विष्णु की शक्ति से प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ और होलिका जल कर भस्म हो गई।

यह पौराणिक कथा हमें इस बात का सन्देश देती है की हमेसा बुराई पर अच्छाई की जीत अवश्य होती है। आज भी फाल्गुन मास की पुर्णिमा को होली जलाते हैं, और अगले दिन सब लोग एक दूसरे पर गुलाल, अबीर और तरह-तरह के रंग डालते हैं। इसीलिए इसे रंगों का त्योहार भी कहते है ।

मशहूर होली

सबसे मशहूर होली वृंदावन की होली मानी जाती है , इसके आलावा ब्रज की होली, मथुरा की होली, बरसाने की होली, काशी की होली पूरे भारत में मशहूर है।

वृंदावन की होली – (Holi in Vrindavan Mathura)

अगर आप असली होली के रंगों को देखना चाहते है तो मधुरा (उत्तर प्रदेश) की वृंदावन की होली को देखिये । मथुरा जो की भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमि हैं। वृंदावन की होली इतनी प्रसिद्ध है कि लोग दूर विदेशों से भी खींचे चले आते हैं। यहां की विश्वप्रसिद्ध होली में रंगों की जो बयार बहती उसका आंनद ही अलग लगता है, यहां की होली भूलाये नहीं भूलती

आखिर वृंदावन की होली इतनी प्रसिद्ध क्यों है?

ऐसा कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण सांवले थे और राधा गोरी थी , वह राधा के गोर रूप को लेकर उनसे चिढ़ते थे…इसलिए सब लोग अक्सर राधा के ऊपर रंग फेकते थे। भगवान श्री कृष्ण राधा को अपने दोस्तों के साथ रंग लगाने जाते थे, जिसके बाद गुस्से में राधा और उनकी सखियाँ कृष्ण और उनके दोस्तों की डंडे से पिटाई करती थी, जिसके बाद इस होली को लट्ठ मार होली के नाम से जाना जाता है । पूरे भारत में होली के दिन ही रंग से खेला जाता है लेकिन मथुरा में होली एक हफ्ते पहले ही शुरू हो जाती है।

वृंदावन में बांके बिहारी जी की मूर्ति को होली के समय मंदिर से बाहर रख दिया जाता है, ऐसा लगता है की बिहारी जी होली खेलने स्वयं ही आ रहे हो, वृंदावन की होली सात दिनों तक लगातार चलती है। यहाँ पे सबसे पहले फूलों से, गुलाल से, सूखे रंगों से, गीले रंगों से सबको अपने रंग में डूबों देने वाली होली खेली जाती है । बांके बिहारी के साथ होली खेलने के लिए दूर दराज के लोग कई घंटों तक लाईन में लगे रहते है, ऐसा दृश्य है यहाँ की होली का ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here