Shivratri: महाशिवरात्रि पूजन विधि और जाने की इस शिवरात्रि क्या न करें1 min read

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महाशिवरात्रि या शिवरात्रि हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह भगवान शिव का प्रमुख पर्व है। जिसे पुरे भारत में बड़े उत्साह और प्रसन्नता के साथ मनाया जाता है। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। कुछ लोगों का मानना है कि सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन से हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग (जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है) के उदय से हुआ। और दूसरी तरफ कुछ लोगों की यह मान्यता रखते है, कि इसी दिन भगवान शिव का विवाह देवि पार्वति के साथ हुआ था। वैसे तो साल में 12 शिवरात्रियां पड़ती है, लेकिन फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि के रूप में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

कैसे करें महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर जल अभिषेक

हम आपको बताते हैं कि महाशिवरात्रि के दिन शिव की पूजा किस तरह से की जाती है, सबसे पहले मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर, ऊपर से बेलपत्र, धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग पर चढ़ायें| हां एक उपाय और बताते है, अगर आपके घर के आस-पास में शिवालय न हो, तो शुद्ध गीली मिट्टी से ही शिवलिंग बनाकर भी उसे पूजा जा सकता है| पौराणिक कथाओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन शिवपुराण का पाठ सुनना चाहिए, रात्रि को जागरण कर शिवपुराण का पाठ सुनना हर एक व्रती का धर्म माना गया है| इसके बाद अगले दिन सवेरे जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करके व्रत समाप्त किया जाता है|

महाशिवरात्रि की पूजन कैसे करे (How to Worship Mahashivaratri)

महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त-गण विविध उपाय करते हैं। लेकिन हर उपाय साधारण जनमानस के लिए सरल नहीं होते।

हम आपको घर पर ही महाशिवरात्रि पूजन की अत्यंत आसान विधि बताने जा रहे है। यह पूजन विधि जितनी आसान है, उतनी ही फलदायी भी। भगवान शिव अत्यंत सरल स्वभाव के देवता माने गए हैं, अत: उन्हें सरलतम तरीकों से ही प्रसन्न किया जा सकता है।

वैदिक शिव पूजन – भगवान शंकर की पूजा के समय शुद्ध आसन पर बैठकर पहले आचमन करें। यज्ञोपवित धारण कर शरीर शुद्ध करें। तत्पश्चात आसन की शुद्धि करें। पूजन-सामग्री को यथास्थान रखकर रक्षादीप प्रज्ज्वलित कर लें।

स्वस्ति-पाठ – स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा:, स्वस्ति ना पूषा विश्ववेदा:, स्वस्ति न स्तारक्ष्यो अरिष्टनेमि स्वस्ति नो बृहस्पति र्दधातु।

1. इसके बाद पूजन का संकल्प कर भगवान गणेश एवं गौरी-माता पार्वती का स्मरण कर पूजन करना चाहिए।

2. यदि आप रूद्राभिषेक, लघुरूद्र, महारूद्र आदि विशेष अनुष्ठान कर रहे हैं, तब नवग्रह, कलश, षोडश-मात्रका का भी पूजन करना चाहिए।

3. संकल्प करते हुए भगवान गणेश व माता पार्वती का पूजन करें फिर नन्दीश्वर, वीरभद्र, कार्तिकेय (स्त्रियां कार्तिकेय का पूजन नहीं करें) एवं सर्प का संक्षिप्त पूजन करना चाहिए।

4. इसके पश्चात हाथ में बिल्वपत्र एवं अक्षत लेकर भगवान शिव का ध्यान करें।

5. भगवान शिव का ध्यान करने के बाद आसन, आचमन, स्नान, दही-स्नान, घी-स्नान, शहद-स्नान व शक्कर-स्नान कराएं।

6. इसके बाद भगवान का एक साथ पंचामृत स्नान कराएं। फिर सुगंध-स्नान कराएं फिर शुद्ध स्नान कराएं।

7. अब भगवान शिव को वस्त्र चढ़ाएं। वस्त्र के बाद जनेऊ चढाएं। फिर सुगंध, इत्र, अक्षत, पुष्पमाला, बिल्वपत्र चढाएं।

8. अब भगवान शिव को विविध प्रकार के फल चढ़ाएं। इसके पश्चात धूप-दीप जलाएं।

9. हाथ धोकर भोलेनाथ को नैवेद्य लगाएं।

10. नैवेद्य के बाद फल, पान-नारियल, दक्षिणा चढ़ाकर आरती करें।

11. इसके बाद क्षमा-याचना करें।

क्षमा मंत्र : आह्वानं ना जानामि, ना जानामि तवार्चनम, पूजाश्चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर:।

इस प्रकार संक्षिप्त पूजन करने से ही भगवान शिव प्रसन्न होकर सारे मनोरथ पूर्ण करेंगे। घर में पूरी श्रद्धा के साथ साधारण पूजन भी किया जाए तो भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं।

महाशिवरात्रि की पूजा में ध्यान रखें ये बातें (Keep These Things in Mind in the Worship of Mahashivaratri)

1. भोलेनाथ को पसंद हैं सफेद फूल – माना जाता है कि भगवान शंकर को सफेद फूल बहुत पसंद हैं। इसीलिए पूजा में लोग धतूरे का फूल चढ़ाते हैं। लेकिन केतकी का फूल भूलकर भी नहीं चढ़ाना चाहिए।

2. तुलसी एक ऐसा पौधा है जिसका प्रयोग सभी तरह की पूजा में और सभी देवताओं में चढ़ाया जाता है। लेकिन भगवान शिव की पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित है। खासकर शिवलिंग में तुलसी नहीं चढ़ाई जानी चाहिए। तुलसी भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है।

3. शिवलिंग का जलाभिषेक करने के लिए जल में चावल के कुछ दाने डालना बहुत ही शुभ माना जाता है। लेकिन ध्यान रहे कि टूटे चावल भूलकर भी न चढ़ाएं। मान्यता है जलाभिषेक के साथ टूटे चावल अशुभ फल देने वाले होते हैं।

4. बिल्व पत्र चढ़ाएं पर खंडित नहीं- जो चीजें भगवान शिव को सबसे ज्यादा प्रिय हैं उनमें से बिल्व पत्र या बेलपत्र है। लेकिन ध्यान रखें कि यह तीन पत्तियों या इससे ज्यादा पत्तियों वाला ही चढ़ाएं। खंडित बिल्व पत्र या कीड़े का खाया बिल्वपत्र भूलकर भी न चढ़ाएं।

कौन रखते है महाशिवरात्रि का व्रत (Who Keeps the Fast of Mahashivaratri)

वैसे तो इस व्रत को कोई भी रख सकता है| धर्मशास्त्रों में कहा गया है, कि भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए महाशिवरात्रि का व्रत रखते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि इस दिन व्रत करने वाले साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि का व्रत करने वाले साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। महाशिवरात्रि के ही दिन भगवान शिव का मां पार्वती के साथ विवाह हुआ था| इसलिए महिलाएं और लड़कियां इस व्रत को बड़े शौक से रखती है। माना जाता है, इस व्रत के प्रभाव से कुंवारी लड़कियों को मनचाहा वर प्राप्त होता है, और जिन महिलाओं का विवाह हो चुका है, उनके पति का जीवन और स्वास्थ्य हमेशा अच्छा रहता है।

महाशिवरात्रि व्रत में क्या खाना चाहिए (What Should be Eaten in Mahashivratri Fast)

भक्त इस बात का ख्याल रखें कि भगवान शिव पर चढ़ाया गया नैवेद्य खाना निषिद्ध है, ऐसी मान्यता है कि जो इस नैवेद्य को खाता है, वह नरक के दुखों का भोग करता है| इस कष्ट के निवारण के लिए शिव की मूर्ति के पास शालीग्राम की मूर्ति का रहना अनिवार्य है| यदि शिव की मूर्ति के पास शालीग्राम हो, तो नैवेद्य खाने का कोई दोष नहीं लगता है|

व्रत के व्यंजनों में सामान्य नमक के स्थान पर सेंधा नमक का प्रयोग करते हैं और लाल मिर्च की जगह काली मिर्च का प्रयोग करते हैं| कुछ लोग व्रत में मूंगफली का उपयोग भी नहीं करते हैं. ऐसी स्थिति में आप मूंगफली को सामग्री में से हटा सकते हैं, व्रत में यदि कुछ नमकीन खाने की इच्छा हो, तो आप सिंघाड़े या कुट्टू के आटे के पकौड़े बना सकते हैं|

इस व्रत में आप आलू सिंघाड़ा, दही बड़ा भी खा सकते हैं, सूखे दही बड़े भी खाने में स्वादिष्ट लगते हैं, इस दिन साबूदाना भी खाया जाता है, साबूदाना में कार्बोहाइड्रेट की प्रमुखता होती है और इसमें कुछ मात्रा में कैल्शियम व विटामिन सी भी होता है| इसका उपयोग अधिकतर पापड़, खीर और खिचड़ी बनाने में होता है, व्रतधारी इसका खीर अथवा खिचड़ी बना कर उपयोग कर सकते हैं| यदि आप उपवास के लिए साबूदाने की खिचड़ी बनाते हुए उसमें नमक सा स्वाद पाना चाहते हैं, तो उसमें सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का प्रयोग करें|

महाशिवरात्रि पर भूलकर भी न करें ये काम (Don’t do This on This Mahashivaratri)

महाशिवरात्रि का त्योहार शिवभक्तों के लिए बहुत महत्व रखता है। लेकिन भूलवश शिवभक्त शिव जी को प्रसन्न करने के लिए ऐसी कुछ गलतियां कर देते हैं, जिससे उनकी पूजा पूरी नहीं हो पाती है।

1. पहली बात, शिवरात्रि के दिन भगवान शिव को यदि प्रसन्न करना चाहते हैं तो इस दिन काले रंग के कपड़े ना पहनें। कहा जाता है की भगवान शिव को काला रंग पसन्द नहीं है, जिसके कारण इस दिन काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए।

2. भगवान श‌िव की पूजा करते समय शंख से जल अर्प‌ित नहीं करना चाहिए।

3. शिव की पूजा में तिल या तिल का तेल नहीं चढ़ाया जाता है।

4. भगवान शिव की पूजा में भूलकर भी टूटे हुए चावल नहीं चढ़ाया जाना चाहिए।

5. शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर नारियल का पानी नहीं चढ़ाना चाहिए। शिव प्रतिमा पर नारियल चढ़ा सकते हैं, लेकिन नारियल का पानी नहीं।

6. हल्दी और कुमकुम उत्पत्ति के प्रतीक हैं, इसलिए पूजन में इनका प्रयोग नहीं करना चाहिए।

7. बिल्व पत्र के तीनों पत्ते पूरे होने चाहिएं, खंडित पत्र कभी न चढ़ाएं।

जानें शिव के इन मूल मंत्र के जाप से भक्‍तों को क्‍या फायदे होते है

1. ॐ नमः शिवाय का 108 बार प्रतिदिन उच्चारण और भगवान शंकर की पूजा आपको हर बाधाओं से मुक्ति दिलाता है।

2. धन प्राप्ति के लिए शिवलिंग पर बेल पत्र अर्पित करते हुए ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। फिर भोलेनाथ की विधिवत आरती करें। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से मनचाहे धन की प्राप्ति होगी।

3. सुबह श्वेत वस्त्र धारण करके शिवलिंग पर महादेवाय नमः मंत्र का जाप करें। इससे भगवान शंकर के साथ देवी लक्ष्मी भी प्रसन्न होती है और ऐसा करने से भगवान भक्तों को धन-धान्य से परिपूर्ण करते हैं।

4. शिवलिंग पर दूध, गंगाजल, दुर्वा और बेलपत्र चढ़ाकर शिव मंत्र ॐ नमः शिवाय का जाप करने से आयु में वृद्धि होती है।

5. भगवान शिव की पूजा करते समय ऊं नमो भगवते रुद्राय मंत्र का जाप करने से भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

6. सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाए और ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे आपसे सभी दुख दूर होते हैं।

7. भगवान शंकर के शिवलिंग पर अगस्त्य फूलों को चढ़ाते हुए ऊं नमः रुद्राय मंत्र का जाप करें। इससे आपका जीवन ऐश्वर्य से परिपूर्ण होगा।

8. रुद्राक्ष की माला पर प्रतिदिन 11 माला (108 बार का एक माला होता है) का जाप करें। इससे आप भय मुक्त होते हैं और भगवान शिव आपके सभी बाधाओं को हर लेते हैं।

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