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हेलो फ्रेंड्स, मैं आज लछमन डुंडी की नवप्रवर्तक की स्टोरी बता रहा हूँ , जो कभी अपने माता-पिता के साथ ईंट-भट्टे पैर काम करता था, आज वो ही एक नवप्रवर्तक बन कर जाना जाता है. बहुत से परिवार है जो भूख के लिए अपना जीवन एक ग़रीबी रेखा से नीचे अपना जीवन काट रहे है. भूक से परिवार एक दिन की रोटी के लिए अपने नन्हें बच्चों को भी काम पे लगा देते है. आप सभी ने कभी ना कभी देखा होगा| होटेल से लेकर फॅक्टरी तक नन्हें बच्चों को काम करते हुए। लेकिन कुछ संस्था जो इन बच्चों को एक न्यू जीवन देने मैं जानी जाती है।

आज मैं आप को एक ऐसे ही लड़के की स्टोरी बता रहा हु. जो पहले अपने माता-पिता के साथ मजदूरी करता था। वो आज एक आविष्कारक पैर अपनी पहचान बना चुके है।हम बात कर रहे है लछमन डुंडी की जो ओडिशा के रहने वाले है. लछमन डुंडी ही अपने माता-पिता के साथ ईंट-भट्ठे पैर काम करता था. आज हम उनको एक आविष्कारक तौर पर जानते हैं। लछमन डुंडी ने सरकार के सहयोग अपनी कंपनी को (startup company) रजिस्टर किया है. लछमन डुंडी अपने आविष्कारक को लोगों तक पहुंचा सकेगें।

लछमन एक छोटे से गाँव कोटमाल के रहने वाले है जो ओडिशा के नुआपड़ा जिला से है। लछमन अभी अपनी एजुकेशन फिजिक्स विषय मैं बीएससी कर रहे हैं। इसके साथ ही, लछमन अपने स्टार्टअप पर भी काम करते है लछमन स्कूल के समय से ही पार्ट टाइम वर्क करता है। लछमन के माता-पिता के पास जमीन भी थोड़ी है। उस थोड़ी जमीन पैर ही धान लगाते और कटाई के बाद, वो काम के लिए आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) कूच करते है.यंहा पैर ही वो ईंट भट्ठों पैर काम करते है .लछमन बताते है.वो दिन हम्हारे लिए मुश्किलों वाले दिन थे। लेकिन एक NGO, Lokdrusti ने मेरे जीवन को ही बदल दिया. मुझे ईंट-भट्ठे से Lokdrusti की टीम ने निकालकर स्कूल में पहुँचाया। मेरी उस टाइम उम्र 10 साल की थी। Lokdrusti की टीम ने मुझे स्कूल में एडमिशन कार्य or मुझे रहने के लिए एक हॉस्टल भी मिला।

विज्ञान में गहरी दिलचस्पी थी

लछमन स्टार्टअप शुरू कियाकी विज्ञान मैं दिलचस्पी थी। स्कूल में जो भी पढ़ते उसी पैर घर आ कर एक्सपेरिमेंट भी करना चाहते थे। उनकी इसकी लगन से उन्हें कुछ अलग वर्क करने के लिए दिया जाता था। जब वो नौंवी या दसवीं मैं थे उसी टाइम वो घर पैर ही पढ़ाई कर रहे थे। बिजली की गाँव में बहुत समस्या थी लछमन ने इस समस्या समाधान निकला।

लछमन ने एक डाइनमो और बल्ब साइकिल में लगाया साइकिल चलाने पर बिजली से बल्ब जलता था। लछमन का धीरे-२ इलेक्ट्रॉनिक चीजों में लगाव बढ़ने लगा।
लछमन एक अलग सोच रखने वाला और हर प्रॉब्लम को सोल्वे करता था। दसवीं कक्षा के बाद लछमन के पास अनेक आइडियाज थे.उनका पहला आईडिया 500 रूपए से बिजली बल्ब जलाना।

स्टार्टअप शुरू किया(Startup Company Entrepreneur Industries)

लछमन ने एक स्टार्टअप शुरु किया ताकि लोगो तक वो अपने इनोवेशन को पोंछा सके. लछमन ने अपने स्टार्टअप का नाम ‘Dundi Electronics and Electricals Pvt Ltd‘ रजिस्टर कराया है
लछमन डुंडी हम्हारे लिए एक प्रेरणा है लछमन ने अपने आइडियाज को हक़ीक़त में बदला है। अगर आप लछमन से संपर्क करना चाहते हैं तो उनको lachhhamandundi@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं।

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